हिन्दुइस्म ‘सनातन धर्म’ = (अमृत+गंगा)

हिन्दुओ का प्राचीन धर्म ‘सनातन’ जिसे वैदिक धर्म भी कहते है इसमें वेदो के अनुसार मनुष्यो को अपने-अपने कर्तव्य और धर्म पालन की शिक्षा दी गयी है | इन वेदो के अनुसार मनुष्यो को चार वर्णो में विभक्त किया गया है १ ब्राह्मण २ क्षत्रिय ३ वैश्य ४ शूद्र |
१.जिसमे ब्राह्मण यज्ञ,पूजा -पाठ,अध्यापन आदि,२. क्षत्रिय–इसका कार्य न्याय व्यवस्था देखना,राज्य करना ,समस्त वर्णो की रक्षा करना होता था आदि |
३.वैश्य –इस वर्ण के लोग क्रय विक्रय ,व्यापार आदि से अपना जीवन यापन करते थे | ४.शूद्र–इस वर्ण के लोग कृषि,साफ़-सफाई और अपने से ऊपर वाले वर्णों की सेवा करना आदि था |
ब्राह्मण>क्षत्रिय>वैश्य>शूद्र वेदो में यही क्रम निर्धारित है जिसमे ब्राह्मण सर्वश्रेस्थ बताया गया है|हमारे हिन्दू धर्म का साहित्य इतना विस्तृत और विशाल है जिसमे हमे ज्ञान,विज्ञान,मोक्ष सम्बन्धी अनेक विषयो पर आधारित हर प्रश्न का उत्तर मिल जायेगा|
भारतीय प्राचीन एवम सर्वप्रथम ग्रन्थ जो स्वयं भगवान के द्वारा मानव जाति के कल्याण के लिए उत्पन किये गए वो “वेद” है |वेदों में ब्रह्म (ईश्वर), देवता, ब्रह्मांड, ज्योतिष, गणित, रसायन, औषधि, प्रकृति, खगोल, भूगोल, धार्मिक नियम, इतिहास, रीति-रिवाज आदि लगभग सभी विषयों से संबंधित ज्ञान भरा पड़ा है। वेद मुख्याता चार है १.ऋग्वेद–इसमें भौगोलिक स्थिति और देवताओं के आवाहन के मंत्रों के साथ बहुत कुछ है। ऋग्वेद की ऋचाओं में देवताओं की प्रार्थना, स्तुतियां और देवलोक में उनकी स्थिति का वर्णन है। इसमें जल चिकित्सा, वायु चिकित्सा, सौर चिकित्सा, मानस चिकित्सा और हवन द्वारा चिकित्सा आदि की भी जानकारी मिलती है। २.यजुर्वेद— यजुर्वेद का अर्थ : यत् + जु = यजु। यत् का अर्थ होता है गतिशील तथा जु का अर्थ होता है आकाश। इसके अलावा कर्म। श्रेष्ठतम कर्म की प्रेरणा। यजुर्वेद में यज्ञ की विधियां और यज्ञों में प्रयोग किए जाने वाले मंत्र हैं। यज्ञ के अलावा तत्वज्ञान का वर्णन है। तत्व ज्ञान अर्थात रहस्यमयी ज्ञान। ब्रह्माण, आत्मा, ईश्वर और पदार्थ का ज्ञान। यह वेद गद्य मय है। इसमें यज्ञ की असल प्रक्रिया के लिए गद्य मंत्र हैं। ३. सामवेद–साम का अर्थ रूपांतरण और संगीत। सौम्यता और उपासना। इस वेद में ऋग्वेद की ऋचाओं का संगीतमय रूप है। सामवेद गीतात्मक यानी गीत के रूप में है। इस वेद को संगीत शास्त्र का मूल माना जाता है। ४.अथर्ववेद –थर्व का अर्थ है कंपन और अथर्व का अर्थ अकंपन। ज्ञान से श्रेष्ठ कर्म करते हुए जो परमात्मा की उपासना में लीन रहता है वही अकंप बुद्धि को प्राप्त होकर मोक्ष धारण करता है। इस वेद में रहस्यमयी विद्याओं, जड़ी बूटियों, चमत्कार और आयुर्वेद आदि का जिक्र है।
एक समय ऐसा आया जब इन वेदो को अध्ययन अधयापन करने वाले ब्रह्मिनो की कमी होने लगी और लोग किंगकर्तव्यविमूढ़ होने लगे तब ईश्वर की प्रेरणा से वेदव्यास जैसे महान तापवस्वी का जन्म हुआ जिन्होंने वेदो का अर्थ समझाने के लिए अठारह पुराणों की रचना की| इन पुराणों में भगवन के जन्म,लीला ,उनके पराक्रम और उनके द्वारा समाज को सीधा और सरल ज्ञान दिया गया है | जिससे हर कोई अपने कर्तव्य को भली भाटी समझ सकेे |
१८ पुराण इस प्रकार है १ ब्रह्मपुराण २ पद्मपुराण ३ विष्णुपुराण ४ शिवपुराण ५ भागवतपुराण ६ नारदपुराण ७ मार्केंडयापुराण ८ अग्निपुराण ९ भविष्यपुराण
१० ब्रह्मवैवर्तपुराण ११ लिंगपुराण १२ वराहपुराण १३ स्कन्दपुराण १४ वामनपुराण १५ मत्स्यपुराण १६ गरुड़पुराण १७ ब्रह्मांडपुराण १८ शिवपुराण |

वेद,पुराणों के अलावा १०८ उपनिषद भी है |
अब मै अपने शीर्षक पर आता हु हिन्दुइस्म=(अमृत +गंगा ) यहाँ मै उपर्युक्त हिन्दुइस्म के बारे में बता चूका हू |

अब मै अपने शीर्षक पर आता हु हिन्दुइस्म=(अमृत +गंगा ) यहाँ मै उपर्युक्त हिन्दुइस्म के बारे में बता चूका हू |यहाँ अमृत से तात्पर्य येह है की जिस तरह अमृत का गुण अमर बनाने से है वही गंगा से तात्पर्य पवित्र बनाने से है | उसी प्रकार हमारी हिंदूइस्म धर्म भी उस अमृतगंगा के समान है जो हमें नित्य नियमित पवित्र और अमर बनाती रहती है |

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